विद्यापथ – संस्कृत ज्ञान गंगा
“विद्ययाऽमृतमश्नुते”
ॐ पावनम् स्वागतम्
इस विद्यापीठ का प्रांगण उन सभी जिज्ञासुओं के लिए खुला है जो आधुनिकता के आडंबर को त्यागकर ऋषियों की उस सनातन पद्धति से जुड़ना चाहते हैं। यहाँ हम केवल भाषा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सीखते हैं।
हमारा वातावरण हिमालय की कंदराओं और गंगा के तटों जैसी शांति से युक्त है, जहाँ बटुक शिष्य शिखा-सूत्र धारण कर, गुरु चरणों में बैठकर ‘लघु सिद्धांत कौमुदी’ जैसे ग्रंथों का मंथन करते हैं।
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते”